पत्रकार ग़ालिब रज़ा के पिता स्व रौशन बारी खान का शमसाबाद में मनाया गया चहल्लुम

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शेरघाटी( राहुल राज गुप्ता)। गया जिला के वरिष्ठ पत्रकार ग़ालिब रजा के वालिद अर्थात पिता जी स्वर्गीय रौशन बारी खान उर्फ झुन्नू खान जो पेशे से जन वितरण दुकानदार थे उनके चहारम अर्थात मरणोपरांत चार दिन बाद होने वाले श्रद्धा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहाँ बड़े-बड़े उलमा ए कराम अर्थात मुस्लिम बुद्धिजीवी धर्मगुरुओ ने सबको मानवता के बारे में विस्तृत रूप से बताया और नेक रास्ते पर चलने के लिए मोहम्मद सल्लाह हो अलैहे वस्लम के रास्ते पर चलने के कई अहम बात बताया। साथ ही दुनिया में मृत्यु के बारे में बताया कि मृत्यु अटल है उसे कोई टाल नहीं सकता लेकिन मृत्यु ऐसी होनी चाहिए जो आपके मृत्यु के बाद भी याद रखा जाए। उन्होंने बताया कि हमेशा नेक काम करते रहिए क्युकी ना जाने कब आपको मौत आ जाए।उन्होंने कहा कि आपकी नेकी अर्थात अच्छे कार्य के आधार पर ही जन्नत अर्थात स्वर्ग मिलता है। इसलिए अपने धर्म के मार्ग पर निष्ठा पूर्वक चलें। उन्हीं में से एक उलमा ए कराम मौलाना नदीम अंसारी ने एक वाक्या अर्थात एक सच्ची कहानी सुनाते हुए कहा के एक मां अपने बच्चे के शोक में व्याकुल थी तथा ममता के कारण उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसके बच्चे की मृत्यु हो गई है। वह माँ अपने बच्चे को किसी भी हाल में जीवित देखना चाहती थी। वह चाह रही थी कि मेरा बच्चा किसी भी तरह जीवित हो जाए। बहुत परेशान होने के बाद एक (पीर/ ज्ञानी ) के पास गई और पीर ने उस माँ को वादा किया कि मैं इस बच्चे को जीवित कर दूंगा।
लेकिन पीर ने उस माँ के सामने एक शर्त रखा और कहा कि मुझे एक गिलास पानी चाहिए और वह पानी उसी घर से लाना होगा जिस घर में आजतक किसी की मृत्यु ना हुई हो। वह माँ परेशान होकर हर एक के दरवाजे पर जाकर पूछती रही और उस घर से पानी मांगती रही लेकिन उसे एक भी घर ऐसा नहीं मिला जहां कभी किसी की मृत्यु ना हुई हो। और अंत में वह लौटकर घर चली आई तब तक उसे ज्ञात हो चुका था कि उसका बच्चा वापस नहीं आएगा। क्योंकि मृत्यु अटल है और उससे कोई टाल नहीं सकता। इस मौत का मज़ा हर जानवा चीज़ को चखना है ।
कार्यक्रम के उपरांत कार्यक्रम में उपस्थित परिवार के लोगों ने घर के बड़े बेटे ग़ालिब रजा को पगड़ी बांधकर पिता स्वर्गीय मो रौशन बारी खान की जिम्मेवारी को सौंपा गया। पगड़ी बांधते समय वहां के सारे लोग भावुक हो गए सभी की आंखों नमः थी । क्योंकि अब उनके सर से पिता का साया उठ चुका है और अब उन्हें ही घर परिवार की जिम्मेवारी चलानी पड़ेगी।

पिता के मृत्यु के शोक में बहुत दुखी थे। लेकिन उलमा ए कराम तथा समाज के समस्त बुद्धिजीवी तथा सम्मानित लोगों उन्हें आशीर्वाद दिया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साथ साथ कारी अज़ीजुल्लाह खान, हाफिज शब्बीर रज़ा, हाफिज इरशाद खान, मौलाना एनायत नबी, मौलाना वासिक रज़ा, सैय्यद अब्दुर रहमान, सैय्यद फरमान अहमद आदि , इसके अलावे इस मौके पर बिकोपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि रियासत नवाज़ उर्फ छोटन खान, जदयू प्रदेश महासचिव वारिस अली, समाजसेवी मुनन खान, जदयू नेता मसूद खान, झिकटिया पैक्स अध्यक्ष उम्मत खान, युवा सामाजिक कार्यकर्ता पिंटू खान, पूर्व सरपंच लवाबार पुत्तन खान, के अलावे शोकाकुल परिवार से डुमरिया भाजपा मंडल अध्यक्ष संजीव पाठक, हम पार्टी के नेता प्रवेज़ खान, राजद नेता शब्बन सुल्तान, फैसल खान, प्रभात ख़बर पत्रकार मनोज मिश्रा, के अलावे अन्य गणमान्य लोग उपस्थित होकर मरहूम यानी स्वर्गीय रौशनबारी खान की आत्मा की शांति व उनके बच्चों के सब्र यानी सहन शक्ति के लिए दुआ किया। साथ ही जन्नत में उन्हें आला मकाम मिलेने के लिए भी दुआ की गई।

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