बिहार

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जाति आधारित गणना की रिपोर्ट पर चर्चा के लिये विधानमंडल के 9 दलों की बैठक संपन्न

गया लाईव डेस्क। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में जाति आधारित गणना की रिपोर्ट पर चर्चा के लिये विधानमंडल के 9 दलों की बैठक हुयी। बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने बिहार जाति आधारित गणना 2022 की रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान उन्होंने सभी बिन्दुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने जाति आधारित गणना हेतु कर्मी का पदसोपान, जाति आधारित गणना के चरण, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, बौद्ध, जैन आदि अन्य धर्म के लोगों की विवरणी, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनूसूचित जाति, अनूसूचित जनजाति, अनारक्षित की कोटिवार संक्षिप्त विवरणी जाति आधारित गणना प्रपत्र में उल्लेखित शैक्षणिक योग्यता, आवसीय स्थिति, धर्म, अस्थायी प्रवासीय स्थिति, वैवाहिक स्थिति, आयु, लिंग, जाति का नाम एवं कोड, परिवार के सदस्यों के नाम, परिवार के प्रधान के साथ संबंध, कृषि भूमि, मोटर यान, आवासीय भूमि कार्यकलाप, पति / पिता का नाम, सभी स्त्रोतों से मासिक आय सहित कुल 17 प्रश्नों की विवरणी के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता हम विधायक दल जीतनराम मांझी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा, बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हरी सहनी, कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, वित, वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, एआईएमआईएम के विधायक दल के नेता अख्तरुल ईमान, भाकपा माले के विधायक दल के नेता महबूब आलम, सीपीआई विधायक सूर्यकांत पासवान, सीपीआईएम विधायक अजय कुमार समेत 9 दलों के नेता मौजूद रहे। बैठक में सभी दलों के नेताओं ने कराये गये जाति आधारित गणना कराये की रिपोर्ट पर अपनी-अपनी राय एवं सुझाव दिये। सभी दलों के नेताओं ने जाति आधारित गणना कराये जाने को लेकर मुख्यमंत्री की सराहना की। बैठक के पश्चात् सभी दलों के नेताओं ने मीडिया के सामने तस्वीर खिंचवाई और जाति आधारित गणना को लेकर खुशी व्यक्त की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 से हम जाति आधारित गणना कराने के लिये प्रयासरत थे। हम चाहते थे कि 2021 की जनगणना जो हर दस वर्ष में होती है, जातीय आधार पर हो। 18 फरवरी 2019 को बिहार विधानसभा एवं बिहार विधान परिषद् द्वारा जनगणना जातीय आधार पर कराने हेतु केन्द्र से सिफारिश करने की संकल्प को सर्वसम्मति से पारित किया गया। 27 फरवरी 2020 को बिहार विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से केन्द्र सरकार से जनगणना 2021 जातीय आधार पर कराने के अनुरोध का प्रस्ताव पारित किया गया। 23 अगस्त 2021 को सभी दलों के प्रतिनिधियों के साथ हमने प्रधानमंत्री से मिलकर जाति आधारित गणना कराने का अनुरोध किया था । केन्द्र सरकार द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गयी। फिर हमने निर्णय लिया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना करायेगी। 1 जून 2022 को विधानमंडल के सभी 9 दलों की बैठक बुलायी गयी जिसमें सभी दलों के नेताओं ने जाति आधारित गणना पर अपनी सहमति दी। 2 जून 2021 को मंत्रिपरिषद द्वारा इसे पारित किया गया। जाति आधारित गणना दो चरणों में कराया गया। प्रथम चरण 7 जनवरी से 21 जनवरी 2023 के दौरान सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। इसके पश्चात् द्वितीय चरण का पूरा सर्वे 15 अप्रैल 2023 से 15 मई 2023 तक पूर्ण करना था लेकिन कई प्रकार की समस्यायें आयीं। अंततः सर्वेक्षण का कार्य 5 अगस्त 2023 को पूर्ण कर लिया गया। उसके बाद संपूर्ण आंकड़े संग्रहित किये गये। जाति आधारित गणना का काम पूर्ण होने के बाद बापू के जन्मदिन के शुभ अवसर 2 अक्टूबर को आंकड़ों को जारी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति आधारित गणना के पीछे मेरी धारणा बहुत पहले से रही है। वर्ष 1990 में पूर्व राष्ट्रपति महामहिम ज्ञानी जैल सिंह जी ने मुझे जातीय आधारित जनगणना की आवश्यकता को समझाया था। मैं श्रद्धेय मधुलिमये जी और तत्कालीन वित मंत्री मधु दंडवते जी से मिला था। उसके उपरांत मैं तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी से मिला था और इस पर चर्चा की थी परंतु उस समय जनगणना पहले ही शुरू हो चुकी थी। इस कारण उसमें कोई बदलाव नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति आधारित गणना की रिपोर्ट में सभी वर्गों की डिटेल जानकारी दी गयी है। पूरे तौर पर ठीक ढ़ंग से सर्वे किया गया है। हर जाति की जानकारी दी गयी है। हर परिवार की आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति की जानकारी ली गयी है। अब जाति आधारित गणना की रिपोर्ट आने के बाद सभी दलों की राय से हमलोग राज्य के हित में इस पर काम करेंगे। राज्य के सभी लोगों के उत्थान के लिये इस पर आगे विचार विमर्श कार्य किया जायेगा। हमलोगों का मकसद है लोगों को आगे बढ़ाने का, जो पीछे है, उपेक्षित है, उसकी उपेक्षा न हो । सब आगे बढ़ें। इन सब चीजों को ही ध्यान में रखकर काम किया जायेगा। हमलोगों का मकसद है सभी का विकास करना, उन्हें आगे बढ़ाना है। राज्य के हित में सबकी सहमति से कार्य करेंगे। बैठक में कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सुहैल, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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