अडाणी को 1020 एकड़ जमीन सौंपना बिहार की पीठ पर खंजर : पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह
गया लाइव डेस्क। गयाजी शहर के राजेंद्र आश्रम स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने भाजपा-जेडीयू सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार की सरकार ने राज्य को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पलायन, अपराध और संसाधनों की लूट की ओर धकेल दिया है।
पूर्व मंत्री सिंह ने घोषणा की कि कांग्रेस आने वाले दिनों में “20 साल – 20 सवाल” अभियान के तहत राज्य सरकार से जवाब मांगेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि “प्रधानमंत्री एक पेड़ माँ के नाम पर लगवाते हैं और पूरा जंगल अडाणी के नाम कर देते हैं। अडाणी को 3 लाख करोड़ और युवाओं को लाठी — यही है भाजपा-जेडीयू का विकास मॉडल।”
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने पीरपैंती में प्रस्तावित 2400 मेगावाट विद्युत परियोजना को सरकारी परियोजना के रूप में शुरू करने की जगह अडाणी पावर को सौंप दिया। जुलाई 2024-25 के बजट में इस परियोजना की लागत ₹21,400 करोड़ बताई गई थी, लेकिन 5 अगस्त 2025 को बिहार कैबिनेट ने 1020.60 एकड़ जमीन अडाणी समूह को मात्र ₹1 सालाना लीज पर देने का निर्णय लिया, जिसे कांग्रेस ने “बिहार की पीठ पर खंजर” बताया।
अवधेश सिंह ने कहा कि सरकार ने अडाणी पावर से ₹6.075 प्रति यूनिट की दर से 2400 मेगावाट बिजली 25 वर्षों के लिए खरीदने का समझौता किया है, जबकि यही कंपनी महाराष्ट्र में ₹3.67, उत्तर प्रदेश में ₹3.727 और पश्चिम बंगाल में ₹3.6 प्रति यूनिट की दर से बिजली सप्लाई कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि “जब अन्य राज्यों में दरें कम हैं, तो बिहार सरकार ने रेट घटाने की कोशिश क्यों नहीं की?”
कांग्रेस ने दावा किया कि इस सौदे से बिहार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होगा। पार्टी के अनुसार, परियोजना के तहत प्रतिदिन करीब 5.76 करोड़ यूनिट बिजली खरीदी जाएगी, जिसकी दैनिक लागत ₹34.99 करोड़, वार्षिक लागत ₹12,771.96 करोड़, और 25 वर्षों में कुल लागत ₹3,19,299 करोड़ रुपये होगी।
यदि दर ₹5 प्रति यूनिट होती, तो बिहार को ₹56,475 करोड़ रुपये की बचत हो सकती थी।
पूर्व मंत्री सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने देशभर में अडाणी समूह को बड़े पैमाने पर जमीनें और जंगल सौंपे हैं — असम में 3000 बीघा, छत्तीसगढ़ में 1742 हेक्टेयर घना जंगल, मध्यप्रदेश के धीरौली में 3500 एकड़ जंगल, और बिहार के पीरपैंती में 1020 एकड़ जमीन। उन्होंने इस सौदे को “सत्ता और कॉर्पोरेट के बीच की सांठगांठ” बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और बिहार के हितों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक आवाज बुलंद करेगी।
