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गया में आवारा कुत्तों का कहर! रोज़ 100+ लोग शिकार, CCTV में कैद मासूम पर हमला

गया लाइव डेस्क। गया शहर में बढ़ती गर्मी के साथ स्ट्रीट डॉग का आतंक खतरनाक रूप ले चुका है। रोजाना 100 से अधिक लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं, जबकि एक मासूम पर हमला CCTV में कैद होने से दहशत और बढ़ गई है।

बिहार के गया शहर में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है। गर्मी बढ़ते ही शहर के कई इलाकों में स्ट्रीट डॉग के हमले लगातार बढ़ गए हैं। हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन 100 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस बढ़ती संख्या ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर के जीबी रोड, नई गोदाम, बैरागी और आसपास के इलाकों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। ये झुंड राह चलते लोगों, बच्चों और यहां तक कि बुजुर्गों पर भी हमला कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही सड़कों पर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई लोग डर के कारण बच्चों को घर से बाहर खेलने तक नहीं भेज रहे हैं।
इसी बीच करीमगंज मोहल्ले से एक बेहद डरावनी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। एक मासूम बच्चा अपने घर के बाहर खेल रहा था, तभी अचानक कुत्तों के झुंड ने उसे घेर लिया। बच्चा कुछ समझ पाता, इससे पहले ही कुत्ते उस पर झपटने लगे। हालांकि, बच्चे की चीख सुनकर परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे बचा लिया। राहत की बात यह रही कि समय रहते हस्तक्षेप होने से बड़ी अनहोनी टल गई। पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब तेजी से फैल रहा है।

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इस घटना के बाद इलाके में भय का माहौल और गहरा गया है। अभिभावक अब बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं। वहीं, लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
जयप्रकाश नारायण अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. संजय कुमार सिंह के अनुसार, गर्मी के मौसम में कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं, जिसके कारण डॉग बाइट के मामले तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों में मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 80 और इमरजेंसी में लगभग 35 मरीज डॉग बाइट के पहुंच रहे हैं, जिन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन दी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि जल्द से जल्द आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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