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13 साल पुराने हत्याकांड में पूर्व विधायक को राहत, अदालत बोली— आरोप साबित करने लायक साक्ष्य नहीं

गया लाइव डेस्क। 13 वर्ष पुराने चर्चित जदयू नेता सुमीरक यादव हत्याकांड में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में राजद के पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत तीन आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा और गवाहों के बयानों के साथ चिकित्सकीय एवं दस्तावेजी साक्ष्यों में भी कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए।

13 साल बाद आया अहम फैसला

26 फरवरी 2013 को जदयू नेता सुमीरक यादव की हत्या के मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने पूर्व विधायक रणजीत यादव, विवेक यादव और देवी यादव को दोषमुक्त करार दिया। लंबे समय तक चले इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया।

कोर्ट ने क्यों दी राहत?

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ऐसा ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे आरोप संदेह से परे साबित हो सकें। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों में कई अहम विरोधाभास थे।

गवाहों की गवाही पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान पेश किए गए कई गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते थे। अदालत ने माना कि कुछ गवाहों के बयान घटना की परिस्थितियों से पूरी तरह संगत नहीं थे। वहीं, अनुसंधानकर्ता (आईओ) की गवाही भी अभियोजन पक्ष के मामले को निर्णायक रूप से मजबूत नहीं कर सकी।

मेडिकल रिपोर्ट भी नहीं बनी मजबूत आधार

फैसले में अदालत ने चिकित्सकीय साक्ष्यों और मौखिक गवाही के बीच अंतर का भी उल्लेख किया। न्यायालय के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान एक-दूसरे की पर्याप्त पुष्टि नहीं करते, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हुआ।

अभियोजन पक्ष नहीं कर सका आरोप सिद्ध

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के लिए आरोपों का संदेह से परे सिद्ध होना आवश्यक है। इस मामले में अभियोजन पक्ष उस कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। इसी आधार पर तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।

चर्चा में रहा था यह हत्याकांड

सुमीरक यादव हत्याकांड उस समय क्षेत्र का चर्चित मामला था और इसमें पूर्व विधायक का नाम सामने आने के कारण यह राजनीतिक रूप से भी सुर्खियों में रहा। अब 13 वर्षों बाद आए इस फैसले ने मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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