गयाबिहार

मन, बुद्धि और आत्मा तीनों को पवित्र करता है भागवत का श्रवण

गया लाइव डेस्क। शहर के धर्मसभा भवन में रविवार को श्रीमद्‌ भागवत कथा का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक एवं भागवत मर्मज्ञ डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने प्रथम दिवस की कथा का रसामृत पान कराते हुए भक्तजनों को भावविभोर कर दिया। कथावाचन के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम भक्त उद्धव जी के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान ने उद्धव से अपने धाम प्रस्थान की बात कही। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि उनके जाने के बाद संसार में माया प्रबल हो जाएगी और प्रभाव बढ़ जाएगा। जिससे बच पाना सामान्य लोगों के लिए कठिन होगा। इसपर उद्धव जी ने अत्यंत विनम्रता और दृढ़ विश्वास के साथ उत्तर दिया कि प्रभु की माया चाहे समस्त प्राणियों को प्रभावित कर ले, परंतु उन पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं, क्योंकि उन्होंने भगवान का जूठन ग्रहण किया है और यह दिव्य प्रसाद उन्हें सदैव श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति में स्थिर रखेगा। इसके बाद भगवान का तेज पुंज निकला और श्रीमद भागवत में प्रवेश कर गया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमदभागवत भगवान की शब्दरूपी मूर्ति है।
भक्ति के मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य प्रकाश भागवत
उन्होंने श्रीमद् भागवत महात्म्य पर चर्चा करते हुए कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य प्रकाश है। डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने बताया कि भागवत का श्रवण मन, बुद्धि और आत्मा तीनों को पवित्र करता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के साक्षात दर्शन का माध्यम श्रीमद् भागवत ही है, क्योंकि इसमें भक्त और भगवान का अद्वैत प्रेम प्रकट होता है। महाराज के विचारों से श्रद्धालु भाव-विह्वल हो उठे और कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर हो गया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमद भागवत के 6 अध्याय पद्म पुराण से लिए गए हैं। उन्होंने इसका श्रवण श्रद्धालुओं को कराया। इस कथा की मुख्य यजमान गयाजी की ही रहने वाली धर्मपरायण महिला मुन्नी देवी हैं।
पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो हम डूब जाएंगे…
कथा के दौरान भजन-कीर्तन का भावपूर्ण वातावरण तब और गहरा हो गया जब महाराज जी ने पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो हम डूब जाएंगे…, हमरा कुछ न बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी.. और राधा रमण हरि बोल…जैसे संवेगपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी। इन पंक्तियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो दिया और पूरा परिसर कृष्णमय हो उठा। श्रोतागण तालियों और जयकारों के साथ भजनों में सहभागी बने। भजन-कीर्तन के बीच डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने बताया कि भक्ति का मार्ग ही जीवन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। भक्ति, कथा और कीर्तन के इस संगम ने प्रथम दिवस को अत्यंत भावपूर्ण और अविस्मरणीय बना दिया।
धुंधकारी और गोकर्ण प्रसंग का श्रद्धालुओं ने किया श्रवण
कथा के दौरान डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने धुंधकारी और गोकर्ण प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि धुंधकारी अपने दुष्कर्मों के कारण प्रेत योनि में भटक रहा था और अत्यंत दुख भोग रहा था। उसका भाई गोकर्ण अतिशय सदाचारी और धर्मनिष्ठ था। जब गोकर्ण को धुंधकारी की पीड़ा का ज्ञान हुआ, तो उन्होंने उसके उद्धार के लिए श्रीमद् भागवत सप्ताह का आयोजन किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि भागवत श्रवण से जीव का कल्याण और उद्धार सुनिश्चित होता है, चाहे वह कितना भी अधर्म में क्यों न पड़ा हो। सात दिसंबर से 13 दिसंबर तक दोपहर दो बजे से संध्या पांच बजे तक कथा होगी।

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