गयाबिहार

जब से देखा बांकेबिहारी तूझे लुट गया, लुट गया…

गयाजी। शहर के धर्मसभा भवन में बुधवार को आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक सह भागवत मर्मज्ञ डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को ध्रुवजी-नारदजी प्रसंग का सरल, भावपूर्ण और प्रेरक वर्णन सुनाया। उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव अपमानित होने के बाद आत्मसम्मान की भावना से वन की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां उनकी भेंट भगवान के प्रिय भक्त नारदजी से होती है। नारदजी ध्रुव को धैर्य, भक्ति और परमात्मा के प्रति समर्पण का उपदेश देते हैं। प्रारंभिक परीक्षा के रूप में नारदजी ध्रुव को समझाते हैं कि क्रोध और अहंकार से कुछ प्राप्त नहीं होता, किंतु दृढ़ भक्ति से असंभव भी संभव बन जाता है। ध्रुव बालक होते हुए भी अदम्य संकल्प और एकनिष्ठ भक्ति का परिचय देते हैं और नारदजी के बताए मार्ग पर चलने का व्रत लेते हैं। महाराज ने इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को बताया कि सच्ची भक्ति मनुष्य के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन ला सकती है। कहा कि शिष्य की सफलता पर सबसे अधिक खुशी गुरु को होती है। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इन प्रसंगों को सुनते रहे।

संत, गुरु और महात्मा का कभी ना कष्ट पहुंचाओ
महाराज जी ने श्रद्धालुओं को मनु, प्रियव्रत और ऋषभ देवजी से संबंधित प्रेरणादायी प्रसंग सुनाए। महाराज जी ने बताया कि किस प्रकार प्रथम पुरुष मनु ने धर्म, संयम और कर्तव्य की भावना को जीवन में सर्वोपरि माना। उनके पुत्र प्रियव्रत के जीवन से उन्होंने यह शिक्षा दी कि जिम्मेदारियां निभाते हुए भी आत्मिक मार्ग पर अडिग रहा जा सकता है। महाराज जी ने विस्तार से समझाया कि प्रियव्रत ने गृहस्थ जीवन अपनाने के बाद भी धर्म और न्याय के मार्ग से कभी विचलित न होकर आदर्श शासन की स्थापना की। अंत में उन्होंने ऋषभ देवजी के त्याग, तपस्या और लोककल्याण के आदर्शों का उल्लेख किया, जिन्होंने राजपाट त्यागकर मोक्ष मार्ग का अनुसरण किया और समाज को सत्य, अहिंसा तथा तपस्या का संदेश दिया। बताया कि ऋषव देवजी ने अपने सौ पुत्रों को बुलाकर उनसे कहा कि संत, गुरु और महात्मा की सेवा मन से करना चाहिए। उनका दिल कभी ना दुखाओ।
बस इतनी तमन्ना है श्याम तुम्हें देखूं…
धर्मसभा भवन कथा के दौरान भजन-कीर्तन से सराबोर रहा। श्रद्धालु भक्तिमय वातावरण में डूबे रहे। महाराज जी ने जब से देखा बांकेबिहारी लुट गया, लुट गया…..,, घनश्याम तुम्हें देखूं…..जैसे भावपूर्ण भजनों का सुमधुर गायन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मधुर वाणी और भक्ति रस से पूरा कथा परिसर आलोकित हो उठा।

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