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कागजी इंसाफ: कोर्ट से जीत के बाद भी अपनी जमीन से बेदखल किसान

गया लाइव डेस्क। गया जिले के खिजरसराय प्रखंड के बड़की बेलदारी गांव में एक किसान को अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कोर्ट से फैसला उसके पक्ष में आने के बावजूद वह आज भी अपनी जमीन पर कब्जा नहीं पा सका है।

गया जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत बड़की बेलदारी गांव में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान को न्याय मिलने के बाद भी हक नहीं मिल पा रहा है। पीड़ित किसान विकास चौधरी ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर भूमाफियाओं ने अवैध कब्जा कर लिया है और वह वर्षों से अपनी जमीन वापस पाने के लिए भटक रहे हैं।
विकास चौधरी, जो जीविका चलाने के लिए ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं, बताते हैं कि सर्वे के दौरान उनकी जमीन गलती से किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा, जहां टाइटिल सूट के जरिए उन्हें डिग्री भी मिल गई। लेकिन इसी कागजी प्रक्रिया का फायदा उठाकर दबंगों ने जमीन पर कब्जा जमा लिया।
पीड़ित का कहना है कि दबंग न सिर्फ उनकी जमीन पर खेती कर रहे हैं, बल्कि जबरन जुताई और फसल की कटाई भी कर लेते हैं। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है और उन्हें डराकर भगा दिया जाता है। इस संबंध में खिजरसराय थाना में आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
विकास चौधरी के परिवार की स्थिति बेहद खराब है। उनकी पत्नी और बेटे का कहना है कि न्याय मिलने के बाद भी अगर जमीन पर कब्जा नहीं मिल रहा, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। परिवार प्रशासन से लगातार गुहार लगा रहा है कि उनकी जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए और उन्हें उनका हक दिलाया जाए।
यह मामला सिर्फ एक किसान की पीड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम की उस हकीकत को उजागर करता है जहां कागजों पर मिला इंसाफ जमीन पर लागू नहीं हो पाता। सवाल यह है कि जब कोर्ट के आदेश भी असरदार नहीं हैं, तो आम आदमी आखिर न्याय की उम्मीद किससे करे?

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