*शेरघाटी में सियासी संग्राम: राजद बनाम एनडीए, तीसरे मोर्चे की एंट्री से बदलेगा खेल*?
गयाजी (अंजनी वर्मा)। शेरशाह सूरी की ऐतिहासिक नगरी शेरघाटी इस बार भी बिहार विधानसभा चुनाव का हॉटस्पॉट बनने जा रही है। 2020 में राजद की मंजू अग्रवाल ने जदयू के दिग्गज विनोद प्रसाद यादव को कड़ी टक्कर में हराकर यह सीट छीन ली थी। अब 2025 का रण और दिलचस्प हो गया है, क्योंकि महागठबंधन और एनडीए की जंग के बीच तीसरे मोर्चे की आहट सियासी समीकरण बदल सकती है।
*चुनावी इतिहास: उतार-चढ़ाव भरी राह*
1957 में अस्तित्व में आई शेरघाटी सीट पर शुरुआती तीन चुनाव (1957, 1962 और 1972) में कांग्रेस का कब्जा रहा। बीच में 1967 में जन क्रांति दल और 1969 में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
1972 के परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में नहीं रही। लंबे अंतराल के बाद 2008 में परिसीमन से दोबारा इसका गठन हुआ और 2010 में जदयू के विनोद प्रसाद यादव पहली बार विधायक बने।
2015 में भी उन्होंने जीत बरकरार रखी, लेकिन 2020 में राजद की मंजू अग्रवाल ने उन्हें करारी शिकस्त दी।
*2020 का चुनावी गणित*
राजद की मंजू अग्रवाल: 61,804 वोट
जदयू के विनोद प्रसाद यादव: 45,114 वोट
जीत का अंतर: 16,990 वोट
*जातीय समीकरण: जीत की चाबी*
यादव मतदाता: 70,000+
मुस्लिम मतदाता: 50-60,000
महादलित: 40,000
अति पिछड़ा: 25,000+
रविदास: 15,000, पासवान: 13,000, कुशवाहा-दांगी: 13,000
राजपूत: 10,000, भूमिहार: 8,000 यानी यादव-मुसलमान गठजोड़ इस सीट पर सबसे निर्णायक कारक है।
*मौजूदा स्थिति और चुनौतियां*
महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है यादव-मुसलमान मतों का बिखराव रोकना। वहीं, एनडीए हर हाल में इस सीट को दोबारा पाने की रणनीति बना रहा है। इस बार जन सुराज जैसे विकल्प भी मैदान में सक्रिय हैं, जो मुकाबले को त्रिकोणीय ही नहीं बल्कि चौकोणीय भी बना सकते हैं।
*5 साल का रिपोर्ट कार्ड*
पिछले कार्यकाल में शेरघाटी में बड़े बदलाव नज़र नहीं आए। कुछ गांवों की सड़कें, सामुदायिक भवन, पुस्तकालय भवन और कला मंच बने, लेकिन बड़े वादे अधूरे रहे।
*अधूरे वादे*:
अनुमंडलीय अस्पताल में डॉक्टरों की कमी।
शेरघाटी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू नहीं हुई।
गोला बाजार से न्यायालय जोड़ने वाला पुल नहीं बन सका।
मोरहर नदी किनारे बाईपास सड़क का काम अधूरा।
शेरघाटी विधानसभा के चुनावी मुद्दे 2025
शेरघाटी को जिला बनाने की मांग।
जीटी रोड के उत्तर बाईपास सड़क का निर्माण।
शहर में जलनिकासी, सड़क और गली की समस्याएँ।
स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे को मजबूत करना।
*मतदाताओं की संख्या*
पुरुष मतदाता: 1,45,194
महिला मतदाता: 1,35,313
थर्ड जेंडर: 10
कुल मतदाता: 2,80,517
*निष्कर्ष*: शेरघाटी का चुनाव इस बार सिर्फ राजद बनाम जदयू या महागठबंधन बनाम एनडीए तक सीमित नहीं रहेगा। तीसरे मोर्चे की मौजूदगी, जातीय समीकरण और अधूरे वादे इस चुनाव को और पेचीदा बना रहे हैं। सवाल यह है—क्या मंजू अग्रवाल सीट बचा पाएंगी, या विनोद यादव जैसे दिग्गज वापसी करेंगे, या फिर नया विकल्प मैदान से बाज़ी पलट देगा?
