बाराचट्टी का रण: 30 साल से दो परिवारों का दबदबा, अब नई चुनौती से मुकाबला रोचक
गयाजी(अंजनी वर्मा)। गया जिले की बाराचट्टी विधानसभा सीट (आरक्षित) हमेशा से राजनीतिक हलचल का केंद्र रही है। यह इलाका कभी नक्सलियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहा, लेकिन पिछले तीन दशकों से यह सीट दो ही परिवारों के बीच घूमती रही है—एक ओर भगवती देवी और उनके परिजन, तो दूसरी ओर ज्योति देवी और उनका राजनीतिक कुनबा।
भगवती देवी की विरासत
बाराचट्टी की राजनीति की धुरी कहें तो सबसे पहले नाम आता है भगवती देवी का। उन्होंने चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, 1977 में जनता पार्टी, 1995 में जनता दल और 2000 में राष्ट्रीय जनता दल से जीत दर्ज कर उन्होंने अपना सिक्का जमाया। बाद में उनकी पुत्री समता देवी और पुत्र विजय कुमार ने भी विधानसभा पहुँचकर विरासत को आगे बढ़ाया।
ज्योति देवी का उदय
वहीं, 2010 में आम गृहिणी के रूप में चुनावी मैदान में उतरीं ज्योति देवी ने पहले ही प्रयास में सभी समीकरण बदल डाले। 57 हज़ार से अधिक वोट पाकर उन्होंने आरजेडी की समता देवी को शिकस्त दी। 2020 में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और 72,491 मत लाकर लगातार दूसरी बार सीट पर कब्ज़ा किया।
तीन चुनावों की तगड़ी टक्कर
2010: जेडीयू की ज्योति देवी – 57,550, आरजेडी की समता देवी – 33,804 (फासला 23,746)
2015: आरजेडी की समता देवी – 70,909, लोजपा की सुधा देवी – 51,783 (फासला 19,126)
2020: हम की ज्योति देवी – 72,491, आरजेडी की समता देवी – 66,172 (फासला 6,319)
स्पष्ट है कि हर चुनाव में यहां मुकाबला महिला प्रत्याशियों के बीच ही रहा है, और हर बार परिणाम ने बाराचट्टी की राजनीति को नई दिशा दी है।
जातीय गणित और समीकरण
इस सीट पर सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं मांझी और यादव वोटर। इनके अलावा वर्मा, मुस्लिम, कोरी और अति पिछड़े वर्ग भी अच्छे-ख़ासे संख्या में हैं। सवर्ण मतदाता भी यहां शक्ति संतुलन में असर डालते हैं। यही वजह है कि हर दल टिकट बंटवारे में बाराचट्टी को गंभीरता से लेता है।
विकास बनाम अधूरे वादे
बीते 5 साल में मोहनपुर–बाराचट्टी सड़क निर्माण, पावर ग्रिड, आवासीय छात्रावास और डैम का जीर्णोद्धार जैसी योजनाएं हुईं। लेकिन गजरागढ़ बाज़ार सड़क, बरंडी बीयर सिंचाई परियोजना, डिग्री कॉलेज, और पुल निर्माण जैसे बड़े वादे आज भी अधूरे हैं। यही मुद्दे 2025 के रण में गरमाने वाले हैं।
2025 का चुनाव: कौन भारी, कौन हल्का?
इस बार भी मुकाबला एनडीए की ज्योति देवी और आरजेडी की समता देवी के बीच माना जा रहा है। लेकिन हालात पहले जैसे नहीं है।
जन सुराज का उदय मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है।
जातीय ध्रुवीकरण और महिला नेतृत्व का प्रभाव, दोनों ही निर्णायक रहेंगे।
वोटों का अंतर घटते जाने से साफ है कि हर बूथ पर संघर्ष इस बार और भी तीखा होगा।संक्षेप में कहें तो, बाराचट्टी विधानसभा चुनाव 2025 अब केवल “दो परिवारों” की परंपरागत जंग नहीं, बल्कि नए दावेदारों की वजह से और भी दिलचस्प होने जा रहा है।
