गयापटनाबिहार

…जी भर के दूंगी बधाई यशोदा मईया, लाला के प्राकट्य के उपलक्ष्य में मनाया गया बधाई उत्सव

गयाजी। शहर के धर्मसभा भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस की कथा भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण रहा। वृंदावन से पधारे अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक व भागवत मर्मज्ञ डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने भगवान कृष्ण के बाल-लीला स्वरूप और लाला के प्राकट्य की दिव्य कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। लाला के प्राकट्य को बधाई उत्सव के रूप में मनाया गया। महाराज जी ने जी भर के दूंगी बधाई यशोदा मईया..दे दो बधाईयां…नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की….भजन की प्रस्तुति की। इसपर सभी श्रद्धालु तालियां बजा-बजाकर झूमने लगे और बधाई गीत गाने लगे। इस दौरान श्रद्धालुओं के बीच खिलौने, टॉफियां, मिठाई आदि का वितरण किया गया, जिससे बच्चों और भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। महाराज जी ने श्रद्धालुओं को दानी और उदार व्यक्ति का अंतर बताया। उन्होंने कई उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि राजा दशरथ, वृषभानु और नंदबाबा उदार थे।
श्रद्धालुओं को सुनाई पुतना उद्धार की कथा
महाराज जी ने श्रद्धालुओं को पुतना प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से जुड़ी पुतना उद्धार की कथा भगवद्भक्ति और दिव्य करुणा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है। कंस ने नवजात कृष्ण को मारने के लिए राक्षसी पुतना को भेजा। पुतना अपने रूप को बदलकर नंद भवन पहुंची और यशोदा-नंद बाबा को मोहित कर शिशु कृष्ण को गोद में लेने लगी। उसने अपने स्तनों पर विष लगाकर बालक को दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन कृष्ण ने उसके प्राण ही खींच लिए। पुतना का जब अंतिम संस्कार किया जा रहा था तक धुंधा से चंदन का सुगंध आया। क्योंकि भगवान कृष्ण ने पुतना के कुकर्मों के बाद भी उसे मातृत्व-भाव से स्वीकार किया और उसे मोक्ष प्रदान किया। महाराज जी ने बताया कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की कन्या थी।
भक्तों ने गिरिराज महाराज की परिक्रमा की
महाराज जी ने श्रद्धालुओं को गौ सेवा व संत सेवा की महिमा बताई। कथा के दौरान भक्तों ने गिरिराज महाराज की परिक्रमा की, जिसमें हर कदम पर जय गिरिराज महाराज की जयकारे गूंजते रहे। परिक्रमा के बाद लाला श्रीकृष्ण को भव्य छप्पनभोग अर्पित किया गया। विविध प्रकार के मिष्ठान्न, फल, मेवे और व्यंजन सुंदर थाल में सजाकर प्रस्तुत किए गए। भक्तों ने आरती कर भावपूर्वक दर्शन किए। शुक्रवार को श्रद्धालु रूक्मिणी विवाह प्रसंग का श्रवण करेंगे। शनिवार को कथा विश्राम करेगी। इस दिन हवन अनुष्ठान भी होगा।

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