गयाबिहार

जीवन-मरण, सुख-दु:ख सब कर्मों पर करता है निर्भर: डॉ. सलिल

गया लाइव डेस्क। शहर के धर्मसभा भवन में चल रही श्रीमदभागवत कथा के षष्टम दिवस पर वृंदावन से पधारे अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने भगवान गिरिराज समेत कई प्रसंगों का श्रवण श्रद्धालुओं को कराया। महाराज जी ने कहा कि एक दिन सुबह से ही वृंदावन में किसी खास पूजा की तैयारी चल रही थी। कन्हैया ने नंदबाबा से पूछा कि बाबा यह किसी पूजा की तैयारी चल रही है? इसपर नंदबाबा ने बड़े प्यार से कहा कन्हैया यह भगवान इंद्र की पूजा की तैयारी चल रही है। कान्हा ने पूछा कि इंद्र की पूजा क्यों? नंदबाबा ने कहा कि हमारे पूर्वजों के समय से ही पूजा होते आ रही है। परंपरा से प्राप्त धर्म छोड़ने से किसी का भला नहीं हो सकता। वृंदावन की खुशहाली के लिए हमलोग साल में एक बार धूमधाम से इंद्र की पूजा करते हैं। नंदबाबा ने कहा कि इंद्र के कृपा से ही अच्छी बारिश और फसल होती है जिससे पूरा वृंदावन खुशहाल रहता है। कन्हैया ने कहा कि इसबार हमलोग गिरिराज भगवान की पूजा करेंगे, क्योंकि वे ही साक्षात नारायण हैं। रही बात खुशहाली की तो बाबा, जीवन-मरण, सुख-दु:ख सब कर्मों पर निर्भर करता है। इसलिए हमलोगों को नारायण रूपी भगवान गिरिराज की पूजा करनी चाहिए। इंद्र को जब पता चला कि वृंदावनवासी हमारी पूजा नहीं कर रहे हैं, तो वे काफी कुपित होकर मेघों को कहा कि ऐसी बारिश करो कि वृंदावन डूब जाए। उसके बाद काले-काले बादल छा गए और घनाघोर वर्षा होने लगी और आंधी चलने लगी। चारों ओर हाकाकार मच गया। वृंदावनवासी कहने लगे रक्षा करो कन्हैया..। कन्हैया ने कहा कि आपलोग सभी छकड़ा, गौएं आदि को लेकर गिरिराज जी पास आ चलिए। सारे लोग वहां पहुंच गए।
गिरिराज धरन, प्रभु तेरी शरण….
इस दौरान महाराज जी ने गिरिराज धरन, प्रभु तेरी शरण, राधा शरण, प्रभु श्याम शरण… भजन की प्रस्तुति की। सारे श्रद्धालु तालियां बजा-बजाकर झूमे। फिर महाराज जी ने श्रद्धालुओं को बताया कि कन्हैया ने एक अंगुली से गिरिराज पर्वत को उठा लिया। उसके नीचे सारे व्रजवासी आ गए। सात दिनों तक सारे लोग गिरिराज पर्वत के नीचे रहे। जब इंद्र को पता चल गया कि कन्हैया साक्षात नारायण के ही अवतार हैं। अांधी-पानी बंद हो गई। इंद्र वृंदावन पहुंचकर कन्हैया से क्षमा मांगी और उनकी स्तुति की।
आज सुबह 11 बजे होगा हवन अनुष्ठान
कथा के दौरान महाराज जी ने श्रद्धालुओं को एकादशी व्रत, तीर्थों में स्नान आदि की विधि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संध्या आरती के बाद श्रद्धालुओं को तीर्थों में स्नान नहीं करनी चाहिए। बताया कि पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद शरीर नहीं पोछें। भींगे वस्त्र भी नदी में नहीं धोने चाहिए। शनिवार को कथा विश्राम लेगी। बताया गया कि सुबह 11 से 12 बजे तक हवन अनुष्ठान और 12 से दोपहर एक बजे कथा होगी।

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