हिंदू परंपरा और मुस्लिम कारीगरों की साझी विरासत: गया में दशहरा पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
गयाजी(आकाश रौशन)। देश में जहां धर्म को लेकर तनाव और विवाद की खबरें आती रहती हैं, वहीं गया शहर से गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल सामने आई है। यहां दशहरा के अवसर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले मुस्लिम कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं।
गांधी मैदान में होने वाले ऐतिहासिक रावण वध कार्यक्रम के लिए इस बार 60 फीट ऊंचा रावण, 55 फीट का कुंभकर्ण और 50 फीट का मेघनाथ तैयार किया जा रहा है। पुतलों को अंतिम रूप देने में मुस्लिम कारीगर मोहम्मद जफर आलम और उनकी टीम जुटी हुई है। जफर आलम तीसरी पीढ़ी के कारीगर हैं, जो दशकों से गया में इन पुतलों का निर्माण कर रहे हैं।
इस आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। डीएम शशांक शुभंकर ने बताया कि भारी भीड़ के कारण भगदड़ की आशंका रहती है, इसलिए ट्रैफिक प्लान बदला गया है।
काशीनाथ मोड़ से गांधी मैदान,
गेवाल बीघा मोड़,
समाहरणालय गोलंबर से काशीनाथ मोड़ की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा।
इसके अलावा वैकल्पिक मार्ग, बैरिकेडिंग, ड्रॉप गेट और पार्किंग स्थल भी बनाए गए हैं।
श्री गया दशहरा चैरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव दीपक चड्डा ने बताया कि इस बार पहली बार दिल्ली से पंजाबी बैंड बुलाया गया है। साथ ही भव्य आतिशबाजी होगी। आजाद पार्क से निकलने वाली शोभा यात्रा विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए गांधी मैदान पहुंचेगी। शोभायात्रा में ऊंट और घोड़े भी शामिल रहेंगे, जो आकर्षण का केंद्र होंगे। गया का दशहरा न केवल भव्यता का प्रतीक है, बल्कि यहां का हिंदू-मुस्लिम भाईचारा भी देश के लिए एक अनोखी मिसाल पेश करता है।
