शिक्षक सम्मान के अमर प्रहरी ब्रजनंदन शर्मा का निधन, शिक्षा जगत सहित समाज ने खोया अपना मार्गदर्शक
गया लाइव डेस्क। बिहार के शिक्षक आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज नाम, बिहार प्राथमिक शिक्षक संघ एवं ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टीचर्स एसोसिएशन के आजीवन अध्यक्ष ब्रजनंदन शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। वर्ष 1967 से लेकर जीवन की अंतिम सांस तक उन्होंने शिक्षक सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को जिस दृढ़ता, ईमानदारी और निःस्वार्थ भाव से लड़ा, वह उन्हें एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था के रूप में स्थापित करता है। उनके निधन से न केवल शिक्षक समाज, बल्कि संपूर्ण आम समाज में अपूरणीय क्षति हुई है।
ब्रजनंदन शर्मा का जीवन संघर्षों से तपकर निकला हुआ वह दीपक था, जिसने दशकों तक शिक्षा जगत को रोशनी दी। वे हमेशा कहते थे।
“आज हमने एक नेक कार्य फिर किया”
और यह कथन उनके पूरे जीवन का सार था। किसी शिक्षक की पीड़ा हो, किसी परिवार की मजबूरी या किसी आम नागरिक की समस्या वे बिना भेदभाव सबकी सहायता के लिए तत्पर रहते थे। उनका घर और मन, दोनों ही हर जरूरतमंद के लिए हमेशा खुले रहते थे।
वे केवल आंदोलनों और ज्ञापनों तक सीमित नेता नहीं थे, बल्कि जमीन से जुड़े ऐसे जननेता थे, जो हर शिक्षक के सुख-दुख को अपना समझते थे। शिक्षक हितों की लड़ाई में उन्होंने कभी समझौता नहीं किया, चाहे परिस्थितियां कितनी ही कठिन क्यों न रही हों। उनका सादा जीवन, स्पष्ट सोच और अडिग संकल्प उन्हें असाधारण बनाता है।
अपने पीछे वे एक भरा-पूरा, संस्कारवान और शिक्षित परिवार छोड़ गए हैं। उनके भाई गिरिजानंदन शर्मा, उनके पाँच पुत्र और दो पुत्रियाँ, गिरिजानंदन शर्मा के तीन पुत्र
डॉ. रविंदर कुमार, अरविंद कुमार, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. अनिल कुमार, सुधीर कुमार, मनोरमा देवी, मंजू देवी, अमरेंद्र कुमार, रजनीश कुमार झुन्ना ,सौरभ रंजन सहित दो पोते—विधायक रमित कुमार और ऋतुराज—पोता-पोती, नाती-नतिनी एवं विस्तृत परिवार शोकाकुल है। यह परिवार न केवल संख्या में बड़ा है, बल्कि संस्कार, सेवा और समाज के प्रति दायित्व की दृष्टि से भी समृद्ध है।
ब्रजनंदन शर्मा का जाना शिक्षक समाज के लिए किसी मजबूत छांव वाले वृक्ष के गिर जाने जैसा है। आज शिक्षक ही नहीं, आम लोग भी यह कह रहे हैं कि उन्होंने अपना सच्चा हितैषी खो दिया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, सेवा और संवेदना का मार्गदर्शक बना रहेगा।
उनका अंतिम संस्कार आज शाम 6 बजे पटना के दिग्घा घाट पर किया जाएगा।
भले ही वे आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके संघर्ष और उनका आदर्श हमेशा शिक्षक आंदोलन और समाज को दिशा देते रहेंगे।
